रचनाकार कौन ?
गलत कहते हैं लोग
कि मैं , तुम या वह रचनाकार है ।
रचनाकार हैं
युगों युगों से मानव मन पर
संचित होते असंख्य प्रभावों के ,
घनीभूत असह्य क्षण .
रचनाकार हैं
युगों युगों से पिए जाते,
विष और अमृत के
परिणामी प्रभाव
जीव की सहन क्षमता को
अतिक्रमित करके जो ,
वमन करा देते हैं .
रचना है वह वमन । .
रचनाकार है प्रकृति और परिस्थितियाँ
और उनका द्वंद्व ।
रचनाकार है
जीवन की गति के निर्णायक क्षण
पकड़ कर युग के रथ का धुरा जो
हजारों वर्ष आगे-पीछे , खींच ले जाते हैं ।
रचनाकार है वह क्षण ,
जो युगों युगों से भोगे गए ,
एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में संक्रमित ,
घटते बढते परिणामी प्रभाव को
शिव के नीलकंठ या चाँद की हँसी की
के रूप में प्रकट कर देता है ।
द्विक -आकर्षण है रचनाकार
और शिशु रूप में रचना जन्म लेती है ।
रचनाकार है द्रौपदी -चीर-हरण,
पांडवों का राज्य-हरण
महाभारत के रूप में रचना प्रकट होती है ।
...............रचना तिथि : २४.०९.१९८२
..............सम्पादित/संसोधित : ११.०९.२०१२
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