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गुरुवार, 11 अक्टूबर 2012

रचनाकार कौन ?

रचनाकार कौन ?


गलत कहते  हैं  लोग  
कि मैं , तुम  या वह रचनाकार  है  ।
रचनाकार  हैं
युगों  युगों  से  मानव  मन  पर
संचित  होते  असंख्य   प्रभावों  के ,  
घनीभूत असह्य क्षण .
रचनाकार हैं
युगों  युगों  से  पिए  जाते,
विष  और  अमृत  के
परिणामी प्रभाव  
जीव की सहन क्षमता को
अतिक्रमित करके  जो ,
वमन करा देते हैं .
रचना  है  वह  वमन  । .
रचनाकार  है  प्रकृति  और  परिस्थितियाँ
और  उनका  द्वंद्व  ।
रचनाकार  है
जीवन  की  गति  के  निर्णायक  क्षण
पकड़ कर युग के रथ का धुरा जो
हजारों वर्ष आगे-पीछे , खींच ले जाते हैं  ।
रचनाकार है वह क्षण ,
जो युगों युगों से भोगे गए ,
एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में संक्रमित ,
घटते बढते परिणामी प्रभाव  को
शिव  के  नीलकंठ  या  चाँद  की  हँसी  की
के रूप में प्रकट कर देता है ।
द्विक -आकर्षण  है  रचनाकार
और  शिशु  रूप  में  रचना  जन्म  लेती  है  ।
रचनाकार  है द्रौपदी -चीर-हरण,
पांडवों  का  राज्य-हरण  
महाभारत के रूप में रचना प्रकट  होती  है  ।
             ...............रचना तिथि : २४.०९.१९८२
             ..............सम्पादित/संसोधित : ११.०९.२०१२
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