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मंगलवार, 22 मई 2012

ज्वालामुखी फटा --


ज्वालामुखी फटा --
दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा
मौत का निवाला बन गया ।
करोड़ों और अरबों की तबाही अचानक हुयी ।

पर जानते भी हो , ज्वालामुखी क्यों फटते हैं ?


यही सवाल वैज्ञानिकों ने पूंछा था ज्वालामुखियों से ।
उसकी राख से, लावे से
और अपनी तर्क बुद्धि के कंप्यूटर से
और उत्तर वही है
जो हम सब जानते है
फिर भी भूल जाते हैं ।



पृथ्वी के अंतर में है धधकती हुयी आग
पिघलती हुई आग
जहां कुछ भी बिना पिघले नहीं रह पाता है
और उसके ऊपर है पानी
जो बूंद बूंद पृथ्वी के अंतर में भरता है
भरता ही जाता है, भरता ही जाता है ।
पिघली हुयी भयानक आग
और सद्यः वाष्पशील जल
दोनों के संपर्क से समुद्भूत
उर्ध्वरेतः वाष्प , घनीभूत, सघनीभूत
प्रचंड से प्रचंडतर
गतिज उर्जा संपन्न
शिव के त्रिशूल सम
पृथ्वी की तहों को तोड़ फोड़ देता है
लावा बह निकलता है , प्रलय कर देता है
आग की नदी का शैलाब बन जाता है
रास्ते में कुछ भी जो जीवित नहीं छोड़ता है

हम ही वह पृथ्वी हैं
हमारे अन्दर है दहकती भयानक आग
मत बना ज्वालामुखी
दूर भाग , दूर भाग

                Kishore Nigam / 22-11-1985

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