मैं उफनती धार हूँ , मैं जिन्दगी हूँ
मैं नहीं साहिल , हूँ मैं मझधार , मैं बस जिन्दगी हूँ
डूबता सूरज नहाकर मेरे जल में, फिर उठेगा
याद का दीपक सुनहरी सांझ में फिर से जलेगा
आंसुओं की धार भी मुस्कान में ढलती रहेगी
और मुस्कानों की खेती अश्रु से सिंचती रहेगी
हर उपेक्षित भावना फिर से जगा दूँ, जिन्दगी हूँ
मैं उफनती धार हूँ , मैं जिन्दगी हूँ —

सुन्दर शब्दों से सजी सार्थक रचना |
जवाब देंहटाएंमीनाक्षी पन्त जी ,प्रशंसा के लिए अति आभार
हटाएंJINDAGI ke naam ki khoobsoorat kriti,,,superb
जवाब देंहटाएंसुमन.रेनू जी ,प्रशंसा के लिए अति आभार
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हटाएंbaut badhiya rachanaa. badhai
जवाब देंहटाएंरचना को पसंद करने के लिए आभार त्रिलोकी नाथ जी
हटाएंआशा है ,विश्वास है , जीवन कि जीवंतता है । उत्साह का संचार करता , अदम्य स्वभाव सहज ही आभिब्यक्त होता ! इन शब्दोँ के शिल्पि को मेरा अभिवादन और बिभिन्न रसोँ का नित नुतन स्वाद चखाने के लिए अनेक - अनेक धन्यवाद !
जवाब देंहटाएंविशेष प्रोत्साहन देने हेतु अत्यंत आन्भार जय प्रकाश रजक जी
हटाएंkhubsurt shbd rchna ... bdhai
जवाब देंहटाएंरचना को पसंद करने के लिए आभार शीला जी
हटाएंsundar aanklan sundar shabd ..sundar prastuti .....
जवाब देंहटाएंमहानुभाव, प्रोत्साहन के लिए आभार |
जवाब देंहटाएंKishore Bhai Ji aik uttam rachnaa - Bahut sunder - Bahut Badhiyaa - मैं उफनती धार हूँ , मैं जिन्दगी हूँ ....Khush Raho Ji....KK
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