ख्वाब शीशे के होते हैं,
ख्वाब शीशे के होते हैं,पत्थर के नहीं ,
देखना बस इतना उन्हें पत्थर न लगे ...
गम उजालों में ही खोते हैं ,अंधेरों की नहीं
उजालों की कोसिस है , कोई खराश न बचे
ख्वाब हैं ,उजाले हैं ,गति है पैरों में
कोई क्यों इसे ढोना जिंदगी का कहे ?
जिंदगी ने खुशियाँ लुटायीं जिन्हें दोनों हाथ
उनकी जिंदगी को कोई बद- नजर न लगे
देखना बस इतना उन्हें पत्थर न लगे ...
गम उजालों में ही खोते हैं ,अंधेरों की नहीं
उजालों की कोसिस है , कोई खराश न बचे
ख्वाब हैं ,उजाले हैं ,गति है पैरों में
कोई क्यों इसे ढोना जिंदगी का कहे ?
जिंदगी ने खुशियाँ लुटायीं जिन्हें दोनों हाथ
उनकी जिंदगी को कोई बद- नजर न लगे
Kishore Nigam / 03/07/12

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