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गुरुवार, 16 अगस्त 2012

ऐ मयूरी ! नाच दे अब ,

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ऐ मयूरी ! नाच दे अब ,
कर रहा यह मेघ कब से छाँव तुझ पर !

क्यों अचल से दृग तुम्हारे , आज स्थिर हो रहे हैं ?
क्यों सजल सी नयन कोरें , उठ रहीं , फिर गिर रही हैं ?
आज साहस साथ लेकर सामने पहुंचा तुम्हारे
आज तो देवांगना इस और अपनी दृष्टि कर दो
कामिनी ! कर प्रलय तू अब !
प्रणय का अनुरक्त मिटने आ गया है आज तुझ पर !
ऐ मयूरी ! 00000000000

पंख फैला नाचने को, पर कहीं तू उड़ न जाना
तरल ज्वाला बिन बुझाये, गगन का मत छोर बनाना
जोड़ दो मन -गाँठ, अब !
नैन बनकर प्रीति-डोरी , बांधते मुझको तुझी पर !
ऐ मयूरी ! 000000000

तेरी अलकों से मलय- सौरभ मचलता आ रहा है (+)
तेरे अधरों पर कुसुम रक्ताभ खिल ,हिल-डुल रहे हैं
तेरे नयनों में गुलाबी स्वप्न विचरण कर रहे हैं
सहज स्वीकृति बोध दे दे !
नव- सृजन का नव -निमंत्रण,ईश का निर्देश तुझ पर
ऐ मयूरी ! 000000000

रात्रि की अमराइयों में कूक तेरी रोज उठती
मधुर मद्धिम प्रीति की अगणित तरंगें है उमड़तीं
मुस्कुरा दे आज पल भर !
जा रहा यह पथिक देकर , प्यार का सब भार तुझ पर
ऐ मयूरी ! 000000000

इस तरह क्यों विवश -मुक्ते ! झुक रहे हैं दृग तुम्हारे ?
हास्यमय रोदन लिए क्यों , मुख-परिधि बनती तुम्हारी ?
शांति से संताप सह अब !
विश्व-दुःख-घन ,आज क्षण भर , घिर पड़ेगा प्रिये तुझ पर !
ऐ मयूरी ! 000000000

आज क्षण विलगाव का है , मिलन की अब "इतिश्री" है
आज तो हंस कर , सहज मन , आत्मा का मिलन कर दो !
मद-हलाहल -अमृत दे दे !
युग-तृषित की तृप्ति का हर भार तुझ पर !
ऐ मयूरी ! 000000000
----- Kishore Nigam 04-11-1974
Note - (+) added 24/05/2012


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