.........(by Suman Mishra)
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जग में आने से पहले ये आहटें थीं मेरे साथ और रहेंगी जग से जाने के बाद भी :-
"जहाँ अस्थि कलश मेरा ,वहीँ होंगीं आहटें यह
यदि प्रवाहित सरित में , कल-कल करेंगी आहटें यह
दफन हो जिस कब्र में यह पञ्चतत्वी देह मेरी
तुम रुके होगे .सुनोगे ,आती तुम्हारी आहटें यह "----
"जहाँ अस्थि कलश मेरा ,वहीँ होंगीं आहटें यह
यदि प्रवाहित सरित में , कल-कल करेंगी आहटें यह
दफन हो जिस कब्र में यह पञ्चतत्वी देह मेरी
तुम रुके होगे .सुनोगे ,आती तुम्हारी आहटें यह "----
............Kishore Nigam 18/06/12

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