
"रात्रिर्गमिष्यति भविष्यति सुप्रभातं ,भानुरुदेश्यति हसिष्यति कमल श्री : ।
इत्थं विचारयति कोषगते द्विरेफे . हा ! हन्त ! हन्त ! नलिनीं गज उज्जहार ।।"
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सोच रहा था कमल कोष में बंद भ्रमर यह
बीतेगी यह रात्रि सुबह फिर होगी प्यारी
निकलेगा फिर भानु
,कमल खिल जाएगा यह
मुझे मिलेगी फिर मेरी आजादी प्यारी
किन्तु हाय दुर्भाग्य सुबह होने के पहले
मस्त एक गज उसी ताल के तट पर पहुंचा
कमल नाल को तोड़ उसे उदरस्थ कर गया
कर्महीन भौरे पर रोती सुबह बिचारी |
मुझे मिलेगी फिर मेरी आजादी प्यारी
किन्तु हाय दुर्भाग्य सुबह होने के पहले
मस्त एक गज उसी ताल के तट पर पहुंचा
कमल नाल को तोड़ उसे उदरस्थ कर गया
कर्महीन भौरे पर रोती सुबह बिचारी |
.............Kishore Nigam / 26/05/12
उत्कृष्ट हिन्दी रुपांतरण!
जवाब देंहटाएंएकदम सरल और समझ में आने वाला अनुवाद
जवाब देंहटाएंअत्यंत सुंदर अनुवाद
जवाब देंहटाएंHardik aabhar Benami ji
जवाब देंहटाएंSandarbh sahit
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर जबाब है अति उत्तम
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