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गुरुवार, 16 अगस्त 2012

तू मेरे अन्दर है, हर क्षण संवाद है.



तू मेरे अन्दर है
हर क्षण संवाद है.
लडखडाना , संभलना,
जीवन की और
गति की पहचान है.
शब्द सहारा हैं
किन्तु अंतिम नहीं ,
तू है सहारा ,
जो मेरे अन्दर है .
अवसाद ,
अवसरों की चूक का ,
या किसी का भी ,
स्वाभाविक है पर निरर्थक है.
चूक का प्रतिकार
केवल आगे की सतर्कता है.
कौन कहता है कि तू अब नहीं है ?                
तू है मेरे अन्दर .
हर क्षण संवाद है.

.............. Kishore Nigam
10/07/2012                                                         https://www.facebook.com/kishore.nigam1

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