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सोमवार, 20 अगस्त 2012

दिन है चुन चुन अँधेरे समेटने को

To some one in frustrated life and confused in glamour:- 

 दिन है चुन चुन अँधेरे समेटने को


दिन है चुन चुन अँधेरे समेटने को
रात है उन में ग़ुम हो जाने को
रंग दुनिया में जितने हैं गिन लो
रात में हैं  सब एक रंग होने को
लोग पीते हैं गम भुलाने को
ये बनी है पर, गम में डुबा देने को
महफ़िलें जल्दी टूट जाएँगी,
जवाब दोगे तब क्या तुम अपने अपने को ?
आहटें आज सुनी तुमने कल के आने की
खुद को तैयार करो कल को जवाब देने को ।
         ..... किशोर निगम / ०३.११.२०११

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