क्रांतिदूत
तुम क्रांतिदूत कहते हो अपने को
तो निश्चित ही तुम्हारे कंठ में
विष टिका होगा
आँखों में दहकते अंगारे
हथेलियों पर लपटें
चेहरे पर उगते सूर्य की लालिमा
पदचालन में आंधी और तूफ़ान होंगे
और ह्रदय में
दया का
ममता का सागर होगा
मानव का
मानवता का
आत्मसम्मान का
कुछ तो सम्मान होगा
अन्यथा होगे तुम कूटनीतिज्ञ कोई
पर क्रांतिदूत नहीं
क्रांतिदूत नहीं......................किशोर निगम /२२/११/१९८५
दया का
ममता का सागर होगा
मानव का
मानवता का
आत्मसम्मान का
कुछ तो सम्मान होगा
अन्यथा होगे तुम कूटनीतिज्ञ कोई
पर क्रांतिदूत नहीं
क्रांतिदूत नहीं......................किशोर निगम /२२/११/१९८५
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