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सोमवार, 20 अगस्त 2012

क्रांतिदूत

क्रांतिदूत


तुम क्रांतिदूत कहते हो अपने को
तो निश्चित ही तुम्हारे कंठ में
विष टिका होगा
आँखों में दहकते अंगारे
हथेलियों पर लपटें
चेहरे पर उगते सूर्य की लालिमा
पदचालन में आंधी और तूफ़ान होंगे

और ह्रदय में
दया का
ममता का सागर होगा
मानव का
मानवता का
आत्मसम्मान का
कुछ तो सम्मान होगा

अन्यथा होगे तुम कूटनीतिज्ञ कोई
पर क्रांतिदूत नहीं
क्रांतिदूत नहीं......................किशोर निगम /२२/११/१९८५ 

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