
टूट जाते है मोती बिखर कर, पिरोई माला से
वो गले के मोहताज नहीं होते
ख़ूबसूरती बिखेर देते है हर जगह अपनी रौनक से
..................अज्ञात
मोती हैं सहेजने के लिए......
मोती हैं सहेजने के लिए , बिखेरने के लिए तो नहीं
वो अंगूठी में सही , झाले में सही , माले में न सही
बिखरे गर धूल में तो , फूल हो या मोती हो ,
कीमत है धूल ही बस , और कोई कीमत तो नहीं ,
मोहताज यहाँ कोई... किसी का भी नहीं हो सकता ,
तुम किसी के जो नहीं , कोई तुम्हारा भी नहीं
कहकहों को भूल से ,न प्यार की थपकी समझो
उनके दुःख अपने है , छल अपने है , तुम्हारे तो नहीं

जिसके घर अपना दिया , तेल बिना सूना है
दूसरों को रौशनी दे , खूबसूरती दे ,--मजाक तो नहीं ?
जिसको एक प्यार की सौगाध मिले , उसके लिए ,
वाहवाही का समंदर भी , एक बूँद से ज्यादा तो नहीं .
..................किशोर निगम / ०४.११.२०११
https://www.facebook.com/pages/Satya-Kishore/275039235935734
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें