अग्निवीणा
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गुरुवार, 16 अगस्त 2012
बरसात की ये चार बूंदें ,
"तुम हमारी जिंदगी में ऐसे आये
जैसे समेटा हो बारिश की बूंदों को
हथेलियों में चंद लम्हे ही ठहर पाए..
.......... (Lovy.)
https://www.facebook.com/kishore.nigam1
"तुम्हारे प्यार की बरसात की ये चार बूंदें ,
जिन्हें अपनी हथेली में समेटा , पी लिया मैंने
यही अमृत बनी , हैं दे रही बस जिंदगी मुझको
नहीं तो जिंदगी सहरा में सूखी धार थी मेरी "
... KishoreNigam /2/7/12
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